मीना गुर्जरी की वीरता

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- मीना/मैना गुजरी एक बहादुर गुजराती महिला थी । मीना गुजरी के नाम से गुजरात की भूमि की एक महिला के गुण और बहादुरी का पता चलता है।
तुर्क सुलतान मीना गुजरी के पिता को मीना से शादी करने का आमंत्रण भेजता है । 
जवाब मे ना सुनके सुलतान को गुस्सा आता है और इस बात का बदला लेने के लिए वो मीना गुजरी के पुरे गांव पर हमला कर देता है । 

तुर्क सुलतान और मीना गुर्जरी के गांव वालों की लड़ाई होने लगी। 
मीना गुर्जरी के भाईयों ने बढ़ चढ़ कर तुर्को पर लाठी बरछे आदि से वर्षा की और महिलाएं भी पीछे नहीं रही। 
मीना गुर्जरी जिसके लिए खून की वर्षा हो रही अपने को संयत न रख सकी । 
उसका खून खौल उठा उसने अपनी तलवार म्यान से खींच ली और तुर्क शहजादों को ललकारा । 
चण्डी का रूप धारण करके मीना ने तुर्को के अनेक सिपाही व सिपहसालार यमलोक पहुंचा दिए। 

किसी को यह अहसास नहीं था कि यह युद्ध विकराल रूप धारण कर लेगा । 
शहजादे के मुकाबते ग्रामीण हथियार बंद भी नहीं थे । लेकिन गुर्जरों ने बड़ी वीरता से तुर्क शहजादे का मान मर्दन किया । 
मीना गुर्जररी के मन पर इस युद्ध में शहीद हुए अपने गुर्जर भाईयों के खून का बदला लेने की धुन सवार हो गई थी ।
इसलिए वह अन्त तक लड़ती रही और उसने ऐसी वीरता तथा युद्ध कौशल दिखाया कि सब हैरान रह गए वह आज इस धर्मयुद्ध क्षेत्र से जीवित लौटना नहीं चाहती थी वह भी अब भाई बन्धुओं की चिता के साथ अपनी चिता बनवाना चाहती थी वह अपने उपर कलंक नहीं चाहती थी कि उसके बचाने के लिए स्व बन्धुओं का इतना बलिदान हुआ है। 
वह लड़ती-लड़ती चक्कर खाकर गिर पड़ी और उसने अपने कलेजे में भी खंजर भौंक कर शहीदों की लाइन में मिल गई । 
लेकिन उसने अपने शरीर पर कामुक तुर्क शहजादे का स्पर्श तक नहीं होने दिया और तुर्क वहाँ से जो बचे थे दुम दबा कर भाग गए। 

मीना गुर्जरी की बहादुरी की चर्चा केवल गुजरात व गुर्जर देश में नहीं सारे भारत में फैल गई । 
आज तक लोक गीतों और लोक कथाओं में मीना गुर्जरी का साखा गाया जाता है। 
प्रायः कहा जाता है कि वास्तविकता भी है कि सुन्दर महिला बहुत नाजुक, कमसिन तथा शारीरिक तौर पर बलवान नहीं होती। 
मगर मीना गुर्जरी जितनी अनिन्दय सुन्दरी थी उतनी ही वीरांगना भी थी। 
मीना गुजरी की वीरता का वृतान्त है जो आज लोक गीतों और लोक कथाओं में प्रचलित है। 1975 मे " Meena Gurjari " नाम से फिल्म बनी जो उस समय काफी प्रचलित हुई और उसके बाद मीना गुजरी की बहादुरी के ऊपर भारतीय सिनेमा मे कई फिल्मे बनी ।यही कारण है कि वह लोक जीवन में लोकप्रिय हो गई है और मर कर भी अमर हो गई है। गुर्जर भाई आप सभी से एक विनती है इस इतिहासिक जानकारी को जितना हो सकें Share करें आप जितना शेयर करोगें समाज उतना की आगे बढ़ेगा 

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