राजपूत गुर्जर छत्रिय

कैनेत शब्द का प्रयोग यहां पर राजपूत चौहानों के लिए किया गया है ।असल मे भी कुछ हिमाचल के  चौहानं राजपूत जो कि भोट जिले के है पहाड़ी क्षेत्रों में बसते है वे खुद गुर्जरो को अपना पूर्वज बताते है उनका पलायन गुजरात से गुर्जर प्रतिहार वंश के पतन यहाँ पहाड़ियों में आकर वस गये।

जिस तरह भारत से अलग हुआ पाकिस्तान भारत के खिलाफ गतिविधियों में संलिप्त रहता है।इसी प्रकार मुगल काल मे हमसे अलग हुए कुछ भाई जिनको कई इतिहाकारो ने माना है कि मुगल काल मे गुर्जरो से अलग हुए थे।लेकिन वो मानने को तैयार नही है।इस हिमांचल सरकार ने भी लिखा है कि गुर्जरो की संतान है।
फिर भी जब हम अपने प्राचीन नाम गुर्जर जो कि धर्म संस्कृति की रक्षा के कारण ही गुर्जर नाम पड़ा जिसमे उच्च कुल के क्षत्रिय थे।

गुर्जर राजपूत एक दूसरे के प्रति विष वमन न करे इतिहास  की सच्चाई को स्वीकार करे।
 जय हो गुर्जर प्रतिहार वंश की ।

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