चंदेल/ चंदीला चंद्रवंशी
चन्देल/चंदीला चंद्रवंशी कहलाया जिसमे हनुमान,सुग्रीब,विक्रमादित्य आदि व्यक्ति हुये।प्राचीन चंद्र वंश को आजकल चंदेल, चंदीला कहा जाता है।इसकी शाखाये मंडेल,मंडार, बुन्देल,मलखाना है।
गहलोट तथा बागड़ी खानदानों की तरह चन्देल बंश के गुर्जर भी परम शक्तिशाली तथा स्वाभिमानी थे।जिन्होंने अकबर के समय म्यान से तलवार निकाली थी।दक्षिण विजय के पस्चात जब अबुलफजल ने बुन्देलखण्ड में प्रवेश किया तो बुंदेले गुर्जरो के हाथों मारा गया।अकबर ने चाल चली बुंदेलों को क्षमा कर दिया।लेकिन उनके दो भाग कर दिये एक वर्ग को जागीर देकर अपना समर्थक बना लिया।जिन्होंने अकवर के लिए गुर्जरो का विनाश कर दिया।आज भी बुन्देला के दो वर्ग है।एक वर्ग राजपूत कहलाता है दूसरा वर्ग देश प्रेमी गुर्जर ही कहलाता है।
महोबा चन्देलों का गढ़ था।विद्याधर चन्देल वह वीर राजा था जिसने महमूद गजनी को दो बार परास्त किया तथा बुन्देलखण्ड से बाहर कर दिया।
चन्देले वह आत्म समांनी गुर्जर थे जिन्होंने कनौज के शाशक राजपाल गुर्जर की केवल इस कारण हत्या कर दी कि उसने बिना युद्ध किये कनौज को महमूद गजनबी से लुटवा दिया था।वीर मलखान वह व्यक्ति था जिसने एक ही समय मे पृथवीराज चौहान तथा जयचंद गहड़वाल से मुकावला किया।उस वीर की संतान आज मलखाना अथवा मलकाना कहलाती है।चंदेला तथा मल्खान वे वीर थे जिन्होंने शेरशाह सूरी को कालिंजर के स्थान पर परास्त किया।शेरशाह सूरी इस युद्ध मे मारा गया।चन्देलों तथा मालकानो की शक्ति का सम्राट अकबर ने हरण कर लिया परंतु कुछ ही समय पश्चात इस वंश की एक शाखा बुन्देला प्रकट हुईं।बुंदेलखंड के एक भाग पर आजकल गुर्जरो के अन्य वंश खटाना का आधिपत्य 1947 ई तक रहा है।जो 1947 तक महाराजा हिज हाइनेस थे।
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