गुर्जर सम्राट नैन सिंह नागर
महाभारत कालीन राजा परीक्षित गढ़ की नगरी:-
परीक्षित गढ़:- इस गुर्जर राज्य की स्थापना करने वाला नागडी /नागर वंश का गुर्जर सरदार जैत सिंह था।जिसने मुगल साम्राज्य के पराभव का लाभ उठाकर अपनी शक्ति को सुदृण बना ली और जमुना व गंगा नदियों के घाटों पर अधिकार जमाकर मुगल दरवार को चुनौती दे दी।
मुगल सेना का सेनापति प्रतापसिंह भारी सेना के साथ गुर्जरो का दमन करने के लिए दिल्ली से रवाना हुआ परंतु राव जैतसिंह ने घोर संग्राम के बाद उसको परस्त करके मार डाला ।प्रताप सिंह के सेना सहित मारे जाने पर दिल्ली का कोतवाल कुँवर अलीशाह गुर्जरो का दमन करने के लिए भारी सेना के साथ पहुचा परंतु गुर्जर योद्धाओं ने उसे भी घोर संग्राम कर सेना सहित मार डाला।
इस प्रकार अनेक बार संघर्षों में मुगल सेनाओं के परास्त होने पर व सेनापतियों के मारे जाने पर मुगल सम्राट अहमदशाह को गुर्जरो से संधि करनी पड़ी।जिसके फलस्वरूप राव जैत सिंह को मेरठ के समस्त पूर्वी परगनो के विस्तृत क्षेत्र का राजा मान लिया गया।(सन 1813 ई)राव जैत सिंह के बाद उनका भतीजा राव नैन सिंह राजा हुआ।
उस समय मराठे उत्तर भारत के स्वामी थे।उन्होंने राजा नैन सिंह गुर्जर का अधिकार 350 गॉव पर भी मान लिया और इस प्रकार परीक्षित गढ़ का नागर गुर्जर राज्य और भी विस्तृत हो गया।
थोड़े समय बाद मराठों को उखाड़ कर अंग्रेजो ने राजा नैन सिंह का अधिकार राज्य के सभी भागों पर माना परंतु बाद में अपनी साम्राज्य प्रसार नीति के अनुसार तथा गुर्जरो की शक्ति तोड़ने के विचार से उसमे मीन मेख निकाली और राजा नैन सिंह गुर्जर के अधिकारों की मान्यता उसके जीवन काल तक के लिए सीमित कर दी।
राजा नैन सिंह गुर्जर की मौत सन 1818ई में हों जाने पर उसका लड़का नत्था सिंह राजा हुआ तो अंग्रेज सरकार ने अपनी तय नीति के अनुसार अहमदशाह व मराठों के साथ हुई संधि पत्रों आदि को चाल बाजी के साथ ठुकराते हुए परीक्षित गढ़ के विस्तृत (हजारो गॉवो)गुर्जर राज्य के अधिकाँश भाग को काट कर छोटी सी जागीर बना दिया।
राव नत्था सिंह के कोई लड़का न होने से उसकी लड़की राजकुमारी जो लंढोरा के गुर्जर राजा खुशहाल सिंह को व्याही थी अपने पिता की जागीर की मालिक बनी (1829ई) इस प्रकार परीक्षित गढ़ का गुर्जर राज्य समाप्त हो गया। उसका बचा हुआ भाग लंढोरा के गुर्जर राजघराने की जागीर बन गया।सन 1875 ई के स्वतंत्रता संग्राम के समय राव कदम सिंह ने परीक्षित गढ़ में स्वतंत्र गुर्जर राज्य की स्थापना करके अंग्रेजो ,जाटों ,सीखो,गौरखो के सहयोग तथा सहायता से विद्रोह को दवाने में सफल हुये और बाद में गुर्जरो से मनमाना बदला लिया।उनके गॉव जलाए गये, सामूहिक फासिया दी गई,गोलियों से उड़ाए गये,जायदाद व जमींदारियां जब्त की गई, हाथों पैरों में कीले गाड़ कर लाशें पेड़ो पर लटकाई गई या चौहराहे पर फेंक दी गई तथा उन गुर्जर वीरों को ,जो इस देश के रक्षक ,शाशक व भारतीयता के रक्षक व पोषक थे।उन्हें अंग्रेजो ने चोर लुटेरे ,अराजकतावादी तथा राजद्रोही कहा गया।
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