महाराजा सूरजमल जाट

दिल्ली के बादशाह नवाब नजीबुद्दौला के दरबार में एक सुखपाल नाम का ब्राह्मण काम करता था । एक दिन उसकी लड़की हल्दौर अपने पिता को खाना देने महल में चली गयी , मुग़ल बादशाह उसके रूप पर मोहित हो गया । और ब्राह्मण से अपनी लड़की कि शादी उससे करने को कहा और बदले में उसको जागीरदार बनाने का लालच दिया ।  ब्राह्मण मान गया और अपनी बेटी की शादी मुग़ल बादशाह से करने को तैयार हो गया । जब लड़की ने यह बात सुनी तो उसने शादी से इंकार कर दिया इससे क्रोधित होकर बादशाह ने लड़की को जिन्दा जलाने का आदेश दिया । मौलवियो ने बादशाह से कहा ऐसा तो यह मर जायेगी । आप इस को जेल में डालकर कष्ट दो और इस पर हरम में आने का दबाव डालो । बादशाह बात  मान गया और लड़की को जेल में डाल दिया । लड़की ने जेल कि जमादारनी से कहा कि  क्या इस देश में कोई ऐसा राजा नहीं है जो हिन्दू लड़की कि लाज बचा सके । जमादारनी ने कहा ऐसा वीर तो सिर्फ  एक ही है लोहागढ़ नरेश महाराजा सूरजमल जाट । बेटी तू एक पत्र लिख वो पत्र मैं तेरी माँ को दे दूंगी । लड़की के दुखो को देख वहाँ काम करने वाली जमादारनी ने लड़की कि मदद कि और लड़की ने  महाराजा सूरजमल के नाम एक पत्र लिखा और उसकी माँ वो पत्र लेकर महाराजा सूरजमल से पास गयी । उसकी कहानी सुन सूरजमल ने ब्रहामण की लड़की छुड़ाने के लिए अपने दूत वीरपाल गुर्जर को दिल्ली भेजा । वहाँ दिल्ली दरबार में जब वीरपाल गूर्जर ने महाराजा सूरजमल जाट का पक्ष रखते हुए लड़की को छोड़ने की बात कही तो बादशाह ने कहा कि *”सूरजमल जाट हमसे क्या ब्रहामणी छुडवाएगा , सूरजमल जाट को जाकर कहना कि अपनी जाटनी महारानी को भी हमारे पास लेकर आए ।”*
अपनी जाटनी महारानी के अपमान में यह शब्द सूनकर वीरपाल गुर्जर, मुसलमानों के भरे दरबार में क्रोध से टूट पड़ा और बहुत से मुसलमान सैनिकों के सिर धड़ से अलग कर दिए । तब बादशाह ने धोखे से पीछे से वार करके वीरपाल गुर्जर कि हत्या का दी और मरते मरते गूर्जर दूत ने कहा कि “वो पूत जाटनी का है , तेरी नानी याद दिला देगा” 

अपने वीरपाल गूर्जर की हत्या की सूचना सुनकर गहरा दुख हुआ जो वास्तव में बहुत असहनीय था और महारानी के अपमान की बात जब भरतपुर में महाराजा सूरजमल ने सुनी तो खड़े हुए और बोले :-

*”चालो र जाट – हिला दो दिल्ली के पाट”* और दिल्ली पर जाटों ने चढाई कर दी….

सूरजमल जाट अपने साथ अपनी जाटनी महारानी को भी युद्ध में ले गया । जाटों और गुर्जरों  ने दिल्ली घेर ली और बादशाह के पास संदेश भिजवाया कि मैं अपनी जाटनी महारनी को साथ लेकर आया हूँ और अब देखता हूँ कि तू मुझसे जाटनी लेकर जाता है या नाक रगड़कर ब्रहामण की हिन्दू कन्या सम्मान सहित लौटाकर जाता है । 

“`यह हिन्दू धर्म की जातिय एकता का अनुठा उदाहरण है कि एक पंडित की बेटी की लाज बचाने के लिए पंडिताइन जाटों से गुहार लगाती है । जाट अपने विश्वासपात्र गूर्जर को भेजते है । जाटनी के अपमान में गूर्जर वीरगति को प्राप्त होता है । गूर्जर की मौत से जाट दिल्ली पर चढ़ाई कर देते हैं ।“`🙏🏻 आपका- सेवक निशांत खटाना🙏🏻

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