खटाना गुर्जर राजवंश

*"खटाना गुर्जर राजवंश
*श्री राम चन्द्र जी के ज्येष्ठ पुत्र लव की संतान लवे या लोवे  गुर्जर कहलाते है।इसकी सैकड़ो शाखाये है।जैसे बलभी ,गहलोत,चेची ,खटाना है।*

*अत्यंत प्राचीन काल मे महाराजा खट भोज महाभारत युद्ध के समय किरोद क्षेत्र (वर्तमान थानेश्वर)का शाशक था।इसी महाराजा की संतान खटाना कहलाई।*

*खटाना वंश में उपरांत दो अन्य राजाओ का नाम भी इतिहास में खटाना है।एक ग्यारहवीं शताब्दी में राजा जयसिंह या जयपाल खटाना का शासन अफगानिस्तान में था।जिसके बारे में ज़ी न्यूज़ ने भी दिखाया था कि 1000 साल पहले अफगानिस्तान ने हिन्दू शासक जयपाल खटाना का शासन था।जय पाल खटाना को धोखे से मारकर मुस्लिमो ने वहां मुगल शासन की नींव रखी ।आज भी अफगानिस्तान में गुर्जर है जो कि मुस्लिम है।इस्लाम जैसे जैसे दुनिया मे बढ़ा उसने हिंदुओ को मारकर अपने शासन स्थापित किये।*

*समथर गुर्जर रियासत झाँसी में खटाना वंश के प्राचीन अभिलेख इस तथ्य के साक्षी है कि जब सिकंदर महान ने 326 ई में वाहलेक(वर्तमान अफगानिस्तान)पर आक्रमण किया तो उस समय सिंधु नदी तथा काबुल के मध्य उनके एक महापुरुष पूर्वज राजा केदार राय का शासन था जिसने सिकंदर महान के विरुद्ध पराजय पाई ।*

*तीसरी शताब्दी में राजा थक राय खटाना ने उत्तरी पंजाव (सतुलज से चिनाव)पर अधिकार कर लिया ।6 वी शताब्दी में इन्होंने राजस्थान के राजौर पर राज्य का शिलान्यासः किया।*

*आठवी शताब्दी में यही वंश फिर आबाद हुआ।राजौर गढ़ से निकल कर उन्होंने वर्तमान होशियार पुर,जालंधर,लाहौर,तथा स्यालकोट जनपदों पर अपना आधिपत्य स्थापित किया।*

*जब भीनमाल तथा मंडोर के प्रतिहार गूर्जरों ने कनौज में गुर्जर साम्राज्य स्थापित किया तथा मिहिर भोज महान गुर्जर प्रतिहार का काल (836 ई -890 ई )आया तो इस वंश का राजा जिसे राजतरंगिणी में अखलान लिखा गया है।जिसे सामान्यता राजा लखन कहा जाता है।जो अपने समय का वीर विजेता था।*

*जिसने कनौज के गुर्जर सम्राट मिहिर भोज महान की इच्छा पर काबुल के ब्राह्मण राजा रतविलास की सहायता   अरबो के विरुद्ध की ।*

*9 बी शताब्दी तक वर्तमान अफगान तथा पठान धार्मिक रूप हिन्दू थे।तथा उनमें गुर्जरो के समान चार वर्ग  थे।अर्थात पठान ब्राह्मण,पठान क्षत्रिय ,पठान वैश्य,पठान शूद्र।*

*खटाना गुर्जरो ने अरब सेना को पराजित कर बहुतों को काबुल में बंदी बना लिया।*

*गुर्जर सम्राट मिहिर भोज का देहांत 890 ई में हुआ ।उसकी म्रत्यु के पश्चात तत्काल ही कश्मीर के राजा शंकर वर्मन ने राजा लखन पर आक्रमण किया तथा इस युद्ध मे नगर कोट का राजा जो लखन का साला था। एक बड़ी सेना लेकर आया परंतु गुर्जरो की पराजय हुई तथा तक देश (वर्तमान पूर्वी पंजाब का उत्तरी भाग)उनके हाथ से निकल कर कश्मीर राज्य में शामिल हुआ।*

*राजा जयपाल खटाना लाहौर से काबुल तक क्षेत्र का शासक था।जिसको महमूद गजनवी ने पराजित किया।सुबुक्तगिन ने जब सर्व प्रथम आक्रमण किया तो उस समय राजा चन्द्रसेन वहां का शासक था।जो इसी खटाना वंश का राजा था ।*

*राजा आनंदपाल के यह  दोनो पुत्र गुर्जरो की काफी संख्या सहित कश्मीर चले गये।जहां से कई बर्षो तक यह गजनी राज्य पर आक्रमण करते रहे।वही कश्मीर में आज गुर्जर बकरवाल है जो खाना बदोश जिंदगी जी रहे है।*

*फिर राजा जयपाल तथा चन्द्रसेन की कुछ संतान राज्य के पतन पर अपनी प्राचीन राजधानी राजौर गढ़ पहुची।जहां मुगल काल तक उनका अधिपत्य रहा ।*
*अकबर ने उनको वहां से उखाड़ फेंका ।फिर ये वंश पुनः पंजाब आया कुछ समय तक शिवालिक के पर्वतों में व्यतीत कर बदायूं क्षेत्र उत्तर प्रदेश पहुचे जहां गंगा तट पर उन्होंने पुवायां  का दुर्ग निर्माण किया।*

*शाहजहाँ ने पुवायां पर आक्रमण किया ।रक्तपाती युद्ध के पश्चात राजकीय वंश के व्यक्ति विध्यांचल के पर्वतों पर पहुचे  तथा बुंदेलखंड पर अधिकार कर लिया।रियासत समथर का शिलान्यासः किया।तथा अपनी राजधानी शमशेर गढ़ *(समथर झाँसी गुर्जर रियासत)को आबाद किया।ये रियासत 1947 तक आबाद रही ।समशेर गढ़ वर्तमान समथर रियासत झाँसी के खटाना गुर्जर राजा प्रथम वर्ग के शासक माने जाते है।उनको हिज हाइनेस स्वीकर किया जाता था। जो 55 हजार रुपये मासिक बृत्ति ले रहे है।*
*रेफरेन्स*
*1-समथर रियासत के अभिलेख बुंदेलखंड।*
*2-गुर्जर इतिहास पांचवें अधयाय लेखक यतीन्द्र कुमार साहब।*
*3-राजतरंगिणी लेखक पंडित कल्हण कश्मीरी सन 1142 ई*
*4-R.A .H चौहान तारीखे गुर्जर पेज 533*
*5- तारीखे गुर्जर गूंज लेखक अकबर खान निवाशी लंदन।*

*जय हो समथर खटाना गुर्जर प्रतिहार रियासत ।*

🙏 *जय गुर्जर वीर गुर्जर* 🙏

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