गुर्जरो के विषय में आर.डी. बनर्जी के विचार

आर.डी. बनर्जी क्या कहते हैं ?

प्रतिहार , परमार , चालुक्य ,चौहान , तंवर , गहलौत आदि वंशों को पूर्ण गुर्जर तथा गहरवार , चंदेल आदि वंशों को ( गुर्जर पिता व अन्य जातियों की माताओं से उत्पन्न ) अर्द्ध गुर्जर मानने वाले प्रसिद्ध इतिहासकार श्री आर.डी. बनर्जी ने अपनी पुस्तक ‘प्रीहिस्ट्रीक, एनशिएंट एंड हिंदू इंडिया’ के ‘दी ओरिजिन ऑफ दी राजपूतस एंड द राइज ऑफ़ जी गुर्जर एंपायर’ – नामक अध्याय में गुर्जर प्रतिहार सम्राटों द्वारा देश व धर्म की रक्षा में अरब आक्रमण के विरुद्ध किए गए संघर्षों का उल्लेख करते हुए लिखा है कि ‘गुर्जर प्रतिहारों ने जो नवीन हिंदुओं अर्थात राजपूतों के नेता थे , उत्तर भारत को मुसलमानों द्वारा विजय करके बर्बाद किए जाने से बचाया तथा इसी प्रकार सारी जनसंख्या को मुसलमान बनने से बचा लिया।’
इस टिप्पणी में डॉ आर.डी. बनर्जी द्वारा जो कुछ कहा गया है उसमें दो बातों पर विशेष रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है – एक तो वह कहते हैं कि राजपूत नवीन हिंदू थे और उनके नेता गुर्जर थे । दूसरे वह हमें यह भी बताते हैं कि गुर्जरों के शौर्य और पराक्रम के कारण इस्लाम के आक्रांता उत्तर भारत में अपनी योजना में सफल नहीं हो पाए । जिसका परिणाम यह निकला कि उत्तर भारत की जनसंख्या मुसलमान होने से बच गई । जहाँ तक उनके द्वारा राजपूतों को ‘नवीन हिन्दू’ कहे जाने की बात है तो इससे राजपूतों के प्राचीन होने का भ्रम समाप्त हो जाता है और यह बात फिर पुष्ट हो जाती है कि मध्यकाल में राजपूत हमारे सभी क्षत्रिय वर्ण के लोगों का एक प्रतिनिधि शब्द बन गया था। जबकि उत्तर भारत का इस्लामीकरण न होने देने में गुर्जर शासकों के महत्वपूर्ण योगदान को श्री बनर्जी द्वारा स्पष्ट किए जाने से गुर्जर शासकों की वीरता , शौर्य और पराक्रम का हमें पता चलता है । साथ ही साथ गुर्जरों के इस महान कार्य से उनकी देशभक्ति और संस्कृति के प्रति समर्पण का भाव भी स्पष्ट होता है । जिसके चलते इस्लामिक आक्रमणकारी भारतवर्ष में भारतीय लोगों के इस्लामीकरण करने की अपनी योजना को क्रियान्वित नहीं कर सके। सचमुच गुर्जर शासकों का यह कार्य बहुत बड़ा है । जिसके लिए भारत की आने वाली पीढ़ियां भी उनकी ऋणी रहेंगी 🙏🏻आपका सेवक- निशांत खटाना🙏🏻

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