श्रीराम मंदिर का निर्माण गुर्जर प्रतिहार राजवंश

##श्रीराम मंदिर का निर्माण गुर्जर प्रतिहार राजवंश द्वारा हुआ,
तो सनातन योद्धाओं की मुर्ति भी लगें मंदिर में 
सनातन इतिहास की धरोहर भगवान श्रीराम मंदिर 

भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अयोध्या के श्री राम जन्म भूमि को लेकर के ,दिए ऐतिहासिक फैसले में पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट को बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया और इसी रिपोर्ट को मद्देनज़र रखते हुए , सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अयोध्या के श्री राम जन्म भूमि को लेकर के दिए ऐतिहासिक फैसले में इतिहास की कुछ कड़ियों का राज़ बहार निकल कर आया हैं।
पुरातत्व  विभाग की रिपोर्ट में कहा गया हैं कि खुदाई में 13वीं शताब्दी ईसा पूर्व तक के अवशेष मिले हैं। उनमे कुषाण , शुंग , गुप्त कल , गुर्जर प्रतिहार आदि युग तक के अवशेष हैं। गोलाकार मंदिर 7वीं शताब्दी से 10वीं शताब्दी गुर्जर प्रतिहार कालीन युग के बीच माना  गया।  प्रारंभिक मध्य युग के अवशेषों में 11-12 वीं शताब्दी की 50 मीटर उत्तर - दक्षिण ईमारत का ढांचा मिला। इसके ऊपर ही एक और विशाल ईमारत का  ढांचा मिला हैं, जिसका फर्श तीन बार में बना। यह  रिहाशी इमारत  न होकर कर के सार्वजानिक उपयोग में की गयी इमारत  थी| रिपोर्ट के अनुसार , इसी के भग्नावशेष पर वह विवादित इमारत  13वीं शताब्दी में बनी।

प्रथम शताब्दी ईसवी के अंतिम चतुर्थ भाग में समाप्ति के लगभग गुर्जर कुषाण कनिष्क ने सम्पूर्ण उत्तरी भारतवर्ष , जिसमे हरदोई जनपद भी शामिल था, अपने राज्य  के अधीन कर लिया। अगले डेढ़ शताब्दी तक कुषाण गुर्जरों ने इस क्षेत्र पर राज्य किया। कुषाण नरेशों के अनन्तर अयोध्या के मित्र नरेशों ने इस क्षेत्र पर राज्य किया। बाद में गुप्त वंश के अधिपत्य के कारण इस क्षेत्र पर गुप्तों का भी शाशन रहा। बाद में गुर्जर प्रतिहारों के उत्तरी भारत में अपना शासन स्थापित कर लेने के बाद ,9वीं शताब्दी से लेकर के 11वीं  शताब्दी  पर्यन्त गुर्जर प्रतिहार राजाओं के आधिपत्य में रहा।

एक महत्वपूर्ण बात ये हैं कि गुर्जर प्रतिहार राजाओं की राजधानी उत्तर प्रदेश के कन्नौज रही हैं। मध्य कालीन युग के ज्यादातर मंदिर गुर्जर प्रतिहारों व गुर्जरों के दूसरे राजवंशो द्वारा निर्मित हैं, चाहे वो गवालियर का तेली मंदिर हों , खजुराहों का मंदिर , मुरैना के स्थित बटेश्वर मंदिर की श्रृंगखला , भोजेश्वर मंदिर , गुर्जर प्रतिहार कालीन ओसियान  जैन मंदिर , गुर्जर देव मंदिर उत्तराखंड , चौसठ योगिनी मंदिर इत्यादि बना गए समस्त मंदिर गुर्जर प्रतिहार कालीन हैं, जो हमारे पुरखों की धरोहर हैं।

ये गुर्जर प्रतिहार कालिन मंदिर हैं क्योंकि जो जो शिलापलक वहां से मिला हैं, जिसमे कुछ पंक्तियों का वर्णन हैं, कि ये उन भगवान विष्णु का मंदिर हैं, जिन्होंने बाली और 10 सर वाले रावण का वध किया था, जैसा कि सभी को ज्ञात हैं बाली का वध भगवान  श्री राम ने किया था। जैसे की आपको पता है गुर्जर प्रतिहारो ने भगवान विष्णू व उनके अवतारो के मंदिर बनवाए  व वराह उपाधि गुर्जर सम्राट मिहिर भोज प्रतिहार ने अपनायी हैं।

एक ही नारा एक ही नाम 
जय श्री राम जय श्री राम
जोर से बोलो जय श्री राम 
जय गुर्जर सम्राट मिहिर भोज महान 
जय सनातन धर्मरक्षक गुर्जर प्रतिहार राजवंश

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तो सनातन योद्धाओं की मुर्ति भी लगें मंदिर में 
सनातन इतिहास की धरोहर भगवान श्रीराम मंदिर 

भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अयोध्या के श्री राम जन्म भूमि को लेकर के ,दिए ऐतिहासिक फैसले में पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट को बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया और इसी रिपोर्ट को मद्देनज़र रखते हुए , सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अयोध्या के श्री राम जन्म भूमि को लेकर के दिए ऐतिहासिक फैसले में इतिहास की कुछ कड़ियों का राज़ बहार निकल कर आया हैं।
पुरातत्व  विभाग की रिपोर्ट में कहा गया हैं कि खुदाई में 13वीं शताब्दी ईसा पूर्व तक के अवशेष मिले हैं। उनमे कुषाण , शुंग , गुप्त कल , गुर्जर प्रतिहार आदि युग तक के अवशेष हैं। गोलाकार मंदिर 7वीं शताब्दी से 10वीं शताब्दी गुर्जर प्रतिहार कालीन युग के बीच माना  गया।  प्रारंभिक मध्य युग के अवशेषों में 11-12 वीं शताब्दी की 50 मीटर उत्तर - दक्षिण ईमारत का ढांचा मिला। इसके ऊपर ही एक और विशाल ईमारत का  ढांचा मिला हैं, जिसका फर्श तीन बार में बना। यह  रिहाशी इमारत  न होकर कर के सार्वजानिक उपयोग में की गयी इमारत  थी| रिपोर्ट के अनुसार , इसी के भग्नावशेष पर वह विवादित इमारत  13वीं शताब्दी में बनी।

प्रथम शताब्दी ईसवी के अंतिम चतुर्थ भाग में समाप्ति के लगभग गुर्जर कुषाण कनिष्क ने सम्पूर्ण उत्तरी भारतवर्ष , जिसमे हरदोई जनपद भी शामिल था, अपने राज्य  के अधीन कर लिया। अगले डेढ़ शताब्दी तक कुषाण गुर्जरों ने इस क्षेत्र पर राज्य किया। कुषाण नरेशों के अनन्तर अयोध्या के मित्र नरेशों ने इस क्षेत्र पर राज्य किया। बाद में गुप्त वंश के अधिपत्य के कारण इस क्षेत्र पर गुप्तों का भी शाशन रहा। बाद में गुर्जर प्रतिहारों के उत्तरी भारत में अपना शासन स्थापित कर लेने के बाद ,9वीं शताब्दी से लेकर के 11वीं  शताब्दी  पर्यन्त गुर्जर प्रतिहार राजाओं के आधिपत्य में रहा।

एक महत्वपूर्ण बात ये हैं कि गुर्जर प्रतिहार राजाओं की राजधानी उत्तर प्रदेश के कन्नौज रही हैं। मध्य कालीन युग के ज्यादातर मंदिर गुर्जर प्रतिहारों व गुर्जरों के दूसरे राजवंशो द्वारा निर्मित हैं, चाहे वो गवालियर का तेली मंदिर हों , खजुराहों का मंदिर , मुरैना के स्थित बटेश्वर मंदिर की श्रृंगखला , भोजेश्वर मंदिर , गुर्जर प्रतिहार कालीन ओसियान  जैन मंदिर , गुर्जर देव मंदिर उत्तराखंड , चौसठ योगिनी मंदिर इत्यादि बना गए समस्त मंदिर गुर्जर प्रतिहार कालीन हैं, जो हमारे पुरखों की धरोहर हैं।

ये गुर्जर प्रतिहार कालिन मंदिर हैं क्योंकि जो जो शिलापलक वहां से मिला हैं, जिसमे कुछ पंक्तियों का वर्णन हैं, कि ये उन भगवान विष्णु का मंदिर हैं, जिन्होंने बाली और 10 सर वाले रावण का वध किया था, जैसा कि सभी को ज्ञात हैं बाली का वध भगवान  श्री राम ने किया था। जैसे की आपको पता है गुर्जर प्रतिहारो ने भगवान विष्णू व उनके अवतारो के मंदिर बनवाए  व वराह उपाधि गुर्जर सम्राट मिहिर भोज प्रतिहार ने अपनायी हैं।

एक ही नारा एक ही नाम 
जय श्री राम जय श्री राम
जोर से बोलो जय श्री राम 
जय गुर्जर सम्राट मिहिर भोज महान 
जय सनातन धर्मरक्षक गुर्जर प्रतिहार राजवंश

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