गुर्जर महाराजा सवाईभोज

महाराज #सवाईभोज, #बगड़ावत_गुर्जर वंश के प्रतापी राजा थे यह 24 भाई बगड़ावतों में से तीसरे नंबर के भाई थे l महाराज सवाईभोज चौहान गुर्जरों के प्रसिद्ध राजा हुए हैं l जिन्हें राजा भोज तथा रावत भोज के नाम से भी जाना जाता था महाराज सवाई भोज अपने पिता बाघ रावत जी के उपरांत बदनोर गोठा की राजगद्दी पर विराजमान हुए तथा अपनी कृति और यश पूरे मारवाड़ मालवा और देश-विदेश में फेलाया महाराज सवाई भोज आठवीं शताब्दी में गोठा के राज सिंहासन पर आसीन हुए थे तथा अपनी राजधानी तारागढ़ से बदनोर और फिर बदनोर से गोठा बनाई थी इनके पास 320 गढ़ो की रियासत थी इन पर चौबीसी भाई राज कर रहे थे इतिहास के अनुसार गुजरात के पाटन पर इनके सबसे बड़े भाई तेजा रावत राज्य करते थे आसींद पर आशा जी बगड़ावत राज्य करते तथा आसींद का नाम इनके ही नाम के ऊपर रखा गया था बदनोर पर इनके पिता श्री बागरावत जी राज कर रहे थे तथा बदनोर का किले का निर्माण भी इन्होंने हीं करवाया और नेगड़िया पर सबसे छोटे भाई नेवाजी बगड़ावत राज कर रहे थे इनका तीर्थ स्थल पुष्कर माना जाता था और पुष्कर में ही इन्होंने अपने इष्ट देव शंकर जी का मंदिर बनवाया था और कुलदेवी माता आशापुरी अजमेर के चौहान वंश के राजाओं के वंशज थे राजा बीसलदेव के भाई मांडल जी चौहान के वंशज थे बगड़ावत गुर्जर इनके काल में किसी मुस्लिम आक्रमणकारियों ने कभी भी आक्रमण नहीं किया क्योंकि इनका भाई देश विदेश में फैला था सवाईभोज जी के बारे में l कुछ विशेष परिचय👇👇👇👇

नाम >सवाई भोज

पिता >बागरावत चौहान

माता > लखमादे राठौड़ी (राजपूतानी)

शस्त्र > तलवार और भाला

गुरु >बाबा रूपनाथ

वंश >बगड़ावत (मूल चौहान)

जीवनसाथी> साडू खटानी

पुत्र >देवनारायण जी ,पुत्री #दीपकंवर 

सवाई भोज कथा बगड़ावत भाइयों का यश पूरे मारवाड़ मालवा और उत्तर प्रदेश तक फेल गया था उस बगड़ावत काल में किसी भी मुस्लिम आक्रमणकारियों ने भारत पर नजर उठाकर भी ना देखा क्षत्रिय गुर्जर वंश में जन्म में श्री सवाई भोज महाराज बड़े ही वीर और बलवान राजा थे पुष्कर इन का तीर्थ स्थल माना जाता था जहां बगड़ावत वीरों ने शिव मंदिर की स्थापना की थी 24 भाई बगडावत बगड़ावत भारत नामक युद्ध में अपने वचन रखते हुए मां चामुंडा को अपना सिर दान में देते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे उसके बाद ही भगवान श्री देवनारायण जी का मालासेरी डूंगरी पर अवतार हुआ था और जितने भी बगड़ावतों की दुश्मन और बेरी थे  उन सब राजाओं से भगवान श्री देवनारायण जी ने बदला लिया और बगड़ावतों का भारत देश में नाम ऊंचा किया

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