महाराज सवाईभोज चौहान गुर्जर
चौहान वंश के सबसे प्रतापी सम्राट भगवान देवनारायण जी केपिताजी____
महाराज सवाई भोज जी चौहान गुर्जर शाखा के बगड़ावत राजवंश के राजा थे इन्हें अन्य नामों से भी जाना जाता है जैसे राजा भोज रावत भोज और सवाई भोज महाराज सवाई भोज ने अपने पिताश्री बागरावत चौहान के उपरांत आठवीं शताब्दी के आसपास गोठा की राजगद्दी पर संभाली थी महाराज भोज रावत को भगवान शिव जी द्वारा राजगद्दी प्राप्त हुई थी इनके गुरुजी का नाम बाबा रूपनाथ जी थ राजा बागरावत चौहान के पुत्र होने के कारण यह इतिहास में बगड़ावत नाम से प्रसिद्ध हुए बगड़ावत 24 भाई थे इनकी की राजधानी अजमेर के निकट बदनोर गोठा थी सवाई भोज महाराज ने कहीं बावड़ीया और मंदिर बनाए थे इनका विवाह उज्जैन के गुर्जर राजा दुदा जी खटाना की पुत्री साडू खटानी से हुआ था उनके पास भगवान इंद्र देव की घोड़ी बावली भगवान शिव द्वारा दी गई थी इनके पास धन खजाने की कोई कमी नहीं थी बगड़ावतों ने अनेक गरीब लोगों को गरीब से धनवान बनाया था इनके राज्य में प्रजा बहुत सुखी थी बगड़ावत भाइयों का यश पूरे मारवाड़ मालवा और उत्तर प्रदेश तक फेल गया था उस बगड़ावत काल में किसी भी मुस्लिम आक्रमणकारियों ने भारत पर नजर उठाकर भी ना देखा क्षत्रिय गुर्जर वंश में जन्म में श्री सवाई भोज महाराज बड़े ही वीर और बलवान राजा थे पुष्कर इन का तीर्थ स्थल माना जाता था जहां बगड़ावत वीरों ने शिव मंदिर की स्थापना की थी 24 भाई बगडावत बगड़ावत भारत नामक युद्ध में अपने वचन रखते हुए मां चामुंडा को अपना सिर दान में देते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे उसके बाद ही भगवान श्री देवनारायण जी का मालासेरी डूंगरी पर अवतार हुआ था और जितने भी बगड़ावतों की दुश्मन और बेरी थे उन सब राजाओं और सामंतों से भगवान श्री देवनारायण जी ने बगड़ावतों का बेर लिया था और अपना यश पूरे भारत में फैलाया महाराज सवाई भोज की याद में आसींद नगरी में भव्य मंदिर भी बना हुआ है पुष्कर में भी इनका मंदिर तथा बगड़ावतों का भी मंदिर है✓ये वही गुर्जर चौहान वंश है जिसने अपने वचन के लिए अपने सिर मां चामुंडा को भेंट में दिए ,वही मंडल जी और बिसलदेव जी का चौहान वंश है ,बाघसिंह चौहान का वंश वही 24 भाईयो का बगड़ावत चौहान वंश है जिसमें 12 वर्ष के जग्गा और 15 वर्ष के जगरूप जैसे वीर योद्धा हुए , नेवा जी चौहान हुए , चौहान वंश जिसमे वीर दीप कंवर बाईसा हुई , भगवान देवनारायण हुए,
बिसलदेव जी का चौहान वंश सोमेश्वर चौहान ,पृथ्वीराज चौहान हुए ।
✓ये वही गुर्जर चौहान वंश है जिसमें वीर जग्गा और जगरूप हुए जो अपने पिता श्री नेवाजि की नीद न टूटे इसलिए दुर्जनसाल की सेना से युद्ध में भीड़ गए कई राजाओं का वध किया ,सेना इतनी डर गई की आगे भी नहीं जाना चाहती थी ,यदि मा चामुंडा भेष बदलकर उनके प्राण ना मांगती तो कहा जाता है कि वे दोनों 12 वर्ष के जग्गा और 15 वर्ष के जगरूप ही 52 गढ़ो के राजाओं को मार डालते ।
✓दीपकंवर बाईसा चौहान श्री सवाई भोज महाराज की पुत्री इतनी वीर योद्धा थी ,अपने पिता के शत्रु को रायला गांव में ही रोक दिया और युद्ध की चुनौती दे दी , इस पर इनके दादा बिसलदेव चौहान कहते है यदि दीपकंवर आप राणा से हार गई तो चौहान कुल लज्जित होगा, आप युद्ध ना करे ।परंतु दीपकंवर बाईसा कहती है म वीर गुर्जर सवाई भोज चौहान की पुत्री हूं राणा और इनकी सेना मुझे पराजित नहीं कर सकते। बाईसा की वीरता देख राणा दुर्जन साल इनके पैरो में गिर कर क्षमा मांगते है, और कहते है हे दीपकंवर बाईसा हम यहां से चले जायेगे आपसे युद्ध नहीं करेंगे हमे जाने दीजिए ,परन्तु बाईसा कहती है काका श्री मै आपको यहां से बिना युद्ध नहीं जाने दूंगी ऐसी ऐसी वीरांगना बगड़ावत गुर्जर वंश में हुई थीतारागढ़ को बैठणो , चक्के राज चौहान
बेटा कहिजे बाघ का नाम सवाई भोज चौहान🙏🙏🙏
Comments
Post a Comment