आशा_देवी_गुर्जर
आज 14 मई के दिन ही श्रीमती #आशा_देवी_गुर्जर (पति गुर्जर विद्रोह मे शहीद हो गए) ने कल्श्याण खाप की महिलाओं की सैना बनाकर 13 और 14 मई को कैराना और शामली की तहसील पर हमला बोल दिया था। खाप (कल्श्याण खाप के अंदर 84 गांव चौहान गौत्र के गुर्जरो के है) व अन्य सभी क्षेत्रीय गांव की महिलाओ को संगठित करके आशादेवी ने अंग्रेजो की सैना को ध्वस्त करदिया व दो दिन और रात तक अंग्रेजी सैना से भीषण युध्द किया औरआस पास के क्षेत्रो मे अपना दबदबा कायम करलिया। आशादेवी के संगठन की ताकत का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता हे कि सगठन की 250 महिला सैनिको की शहादत के बाद ही अग्रेज सेना आशादैवी को युद्धभूमि मे जिन्दा पकड सकी थी। 11 अन्य महिला सैनिको के साथ बर्बर अग्रेजो ने आशादेवी को फासी पर लटका दिया । अपनी बहादुरी से सोये हुए भारत मे शोर्य ओर पराक्रम का आशादेवी ने एक बार फिर नया सचांर किया। अगस्त 2006 मे प्रकाशित सुरेश नीरव की "कादम्बिनी" पुस्तक मे इस बात का वर्णन है। सोचकर भी रूह हिल जाति है कि सोचो कैसा आक्रोश रहा होगा जब घर का आम महिलाए हथ्यार उठा के युध्द मे कुद पठे। कैसी परिस्थित्याँ रही जो...
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